बाज़ार में तरह-तरह का आटा उपलब्ध है। मल्टीग्रेन आटे में भी आपको ढेरों वरायटी मिलेंगी। हर आटे में अलग-अलग पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में हमारी सेहत के लिए कौन सा आटा बेहतर रहेगा?ये रोटियां हमारी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद हैं और किस तरह के आटे की चपाती से हमें कितनी कैलरीज़ मिलेंगी?
गेहूं
इससे रोटियां तो हर घर में बनाई जाती हैं। आपने गौर किया होगा कि दो-तीन दिन अगर बाहर खाना खाया जाए तो अपने आप मन घर की बनी गेहूं की रोटी का करने लगता है। इससे बने आटे में फोलिक एसिड, विटमिन ई, विटमिन बी-6 और बी- कॉम्प्लेक्स जैसे विटमिन और मैग्नीशियम, मैग्नीज़, जिंक जैसे कई मिनरल्स शामिल होते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बहुत लाभकारी हैं। हां, जिन्हें ग्लूटन से एलर्जी है, केवल ऐसे मरीज़ों को ही गेहूं की रोटी की मनाही होती है।
बेसन
बेसन यानी चने का आटा भी आमतौर पर सभी घरों में पाया जाता है। कई तरह से इस्तेमाल होने वाला बेसन निश्चित रूप से खाने का स्वाद बढ़ाता है। आयरन, पाटैशियम, कॉपर, जिंक, फॉस्फोरस, फोलेट, विटमिन बी-6 की प्रचुर मात्रा के साथ बेसन सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह एनीमिया और कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है। यह त्वचा के लिए भी अच्छा होता है। इससे कई तरह के उबटन भी तैयार किए जाते हैं।
बाजरा
बाजरे के आटे में प्रोटीन, मैग्नीशियम, आयरन, फॉस्फोरस और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह विटमिन ई, बी कॉम्प्लेक्स, नायसिन, थायमिन और रिबोफ्लेविन का भी बहुत अच्छा स्रोत है। बाजरा दिल की सेहत के लिए भी अच्छा है और कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में भी सहायक है।
कुट्टू
आमतौर पर कुट्टू का आटा व्रत में ही खाया जाता है। विटमिन बी से भरपूर यह आटा बॉडी को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता है। डायबिटिक लोगों के लिए भी यह अच्छा खाद्य है क्योंकि इसमें मौज़ूद फाइबर शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। यह ग्लूटन-फ्री होता है। इसमें मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर की नसों को आराम देता है और रक्त प्रवाह को सुधारने और पोषक तत्वों के बेहतर संचार में मदद करता है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है।
सोयाबीन
सोयाबीन का आटा स्वास्थ्यकर होता है। इसमें प्रोटीन, थायमिन, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम और डाइटरी फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह मेनोपॉज के दुष्प्रभावों से निपटने में बहुत कारगर है, साथ ही कई बीमारियों से भी बचाता है। हालांकि प्रोटीन की अधिक मात्रा के कारण यूरिक एसिड की अधिकता और थायरॉयड की समस्या में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
मल्टीग्रेन
आजकल बाज़ार में मल्टीग्रेन आटे की ढेरों वरायटीज़ मौज़ूद हैं। यह प्रोटीन युक्त है और मांसपेशियों को भी मज़बूत बनाता है। इसमें फाइबर होने के कारण यह कब्ज़ और पेट के लिए बेहतर है। कम कार्बोहाइड्रेट होने की वजह से यह वज़न नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है। मल्टीग्रेन आटे को डायलिसिस वाले मरीज़, डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी से पीडि़त लोगों के लिए भी अच्छा रहता है। डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।
रागी
रागी में कैल्शियम, आयरन, नायसिन, थायमिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह बार-बार भूख लगने की परेशानी को दूर करते हैं, जिससे वज़न कम करने में भी मदद मिलती है। यह मांसपेशियों, ऊतकों, अस्थियों और त्वचा की मरम्म।
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